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""राम जन्म भूमि होने का प्रमाण""

अयोध्या की बात आते ही..... मुस्लिमों और उनके सरपरस्त
सेकुलरों द्वारा .... हमेशा ही हम हिन्दुओं से अयोध्या में ""राम जन्म
भूमि होने का प्रमाण"" माँगा जाता है..! लेकिन... ऐसा प्रमाण मांगते समय वे यह भूल जाते हैं कि........ उनके
अल्लाह और और उसके पोपट मुहम्मद के अस्तित्व से सम्बंधित प्रमाण
मुस्लिमों के पास "" कुरान"" के अलावा और क्या है...???? हमलोग तो.... समय समय पर अपनी प्रमाणिकता सिद्ध करते ही रहते
हैं..... परन्तु.... मुस्लिमों के पास ... कुल मिला कर एक
ही रटा रटाया जबाब होता है कि..... हमारे कुरान में लिखा है....
इसीलिए ..... वो मुहम्मद हमारा पिगम्बर है.... और, दुनिया में अल्लाह
का अस्तित्व है...! और... जब हम उनसे कुरान के बारे में पूछते हैं तो.......
उनका बोलना होता है कि..... यह अल्लाह की किताब है...! मतलब कि..... पहले अल्लाह पैदा हुआ और.... उसने कुरान लिखा .....
अथवा... पहले मुहम्मद ने कुरान पैदा कर.... अल्लाह को अस्तित्व में
लाया .... समझ से बाहर की बात है...! खैर...... जब बात अयोध्या की करते हैं तो..... मुस्लिमों कहना है कि.....
यहाँ पहले बाबरी मस्जिद थी...... मतलब कि... वहां मंदिर से पहले ""बाबर
द्वारा बनाया गया मस्जिद"" था...! शायद मुस्लिमों का कहना है कि.... सन 1526 ईस्वी में भारत पर
आक्रमण करते समय ..... वो बाबर नामक मंगोल लुटेरा (जो लंगड़े तैमुरलंग
का परपोता ... और चंगेज खान नामक लुटेरे का नाती था)..... अपने कंधे
पर अयोध्या को ढो कर लाया था....... और, भारत आकर उसने
यहाँ स्थापित कर दिया था...! शायद मुस्लिमों और मनहूस सेकुलरों को यह जानकारी नहीं है.... कि....
अयोध्या में राम मंदिर 9वीं-11वीं सदी से ही विराजमान है..... जिस समय
बाबर की तो छोडो.... उनके दादा-परदादों का भी जन्म नहीं हुआ था....! @@@ उस तथाकथित रूप से विवादित स्थल की छान-बीन से पता चला है
कि... वहां पर ९-११ वीं सदी का एक भव्य मंदिर था... जिसके 14 स्तम्भ
थे.. और वे... कसौटी पत्थर (जिसके सोने को परखा जाता है) ... के बने
हुए थे.....!
ये कसौटी पत्थर सिर्फ हिमालय की तराई में पाए जाते हैं.... और.. ११
वीं सदी के आस-पास सारे मंदिरों में यही पत्थर प्रयोग किये जाते थे...! @@@ मंदिर के दक्षिण की ओर बाड़ लगाने से पहले रामजन्मभूमि मंदिर
के पास जमीन के स्तर से लगभग 12 फीट की गहराई में, खूबसूरती से
खुदी शौकीन बलुआ पत्थर के टुकड़े का एक बड़ा ढेर एक बड़े गड्ढे में
स्थित था. आठ प्रख्यात इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के एक समूह
द्वारा एक सावधान अध्ययन से पता चलता है कि ये सभी वस्तुएं 11
वीं सदी के एक हिंदू मंदिर परिसर के वास्तु साक्ष्य हैं..! @@@ इसके अलावा सबसे उल्लेखनीय पत्थर के sculptured
टुकड़े ... उच्च stylized कमल की पंखुड़ियों संकीर्ण समानांतर
राजधानी के आसपास कम जगह में खुदी हुई स्ट्रिप्स के रूप में व्यवस्था के
रूप में सुंदर moldings के साथ एक Piller में बीचोबीच आयताकार रूप में
बनी थी ...! @@@ निरंतर पत्ती मोल्डिंग की एक फ्रीज़ भी पाई गयी .....जो मंदिर
के चबूतरे के शीर्ष लाइनों को सजाता है. @@@ वहाँ के दरवाजे चौखट तथा मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार इस बात
का प्रमाण है.. कि यहाँ एक भव्य मंदिर था.. जहाँ meandering पुष्प
डिजाइन, 'स्टैंसिल' शैली में खुदी थी..! @@@ उपरोक्त के प्रमाणों के अलावा भी वहाँ कई अन्य छवियाँ हैं....
जिसमे से एक शिव - पार्वती की है..!
यह उमा महेश्वर कि मूर्ति है .. जो कि ""उथले नाला नामक टीला"" पर
पाई गयी हैं...!
कला और वास्तु टुकड़े के ये ढेर ..... साइट से कुछ 200 मीटर
की दूरी पर स्थित से मिला था. हालांकि भगवान शिव का सिर मुस्लिम आक्रान्ताओं द्वारा तोड़
दिया गया है , उनके हाथ में त्रिशूल अभी तक बरक़रार है...!
उसी तरह, हालांकि माँ पार्वती का चेहरा वर्तमान नहीं है.. परन्तु फिर
भी भगवान शिव की गर्दन के पीछे से उसके हाथ एक को गले लगाते
स्थिति में मौजूद है..!
और..... Stylistically..... यह भी साबित हो चुका है कि... यह भी 11 वीं सदी के datable है. #### सिर्फ इतना ही नहीं .... ऐसे अनगिनत सबूत मौजूद
हैं .....जो अयोध्या को भगवान् राम की जन्मभूमि साबित करने के लिए
पर्याप्त हैं..! और... ऐसा भी नहीं है कि.... बाबर और उसका सेनापति मीर बाकी.....
अपनी सेना लेकर आया और..... हमारे ""अयोध्या को हलवे की तरह हजम
कर गया""..! इतिहास गवाह है कि... हम हिन्दुओं ने अपने अराध्य श्री राम की जन्म
भूमि को बचाने के काफी लड़ाइयाँ लड़ी है.... और
लाखों कुर्बानियां दी है...! उन लड़ाइयाँ में से कुछ प्रमुख लड़ाइयाँ इस प्रकार हैं..... 1. बाबर के शासनकाल (1528-1530) में अयोध्या में हिंदुओं पर 4 हमले
किए गए.... जिसमें 100,000 लोग मारे गए थे..! 2. हुमायूं के शासनकाल (1530-1556) - हिंदुओं ने अलग होने के लिए
10 बार लड़ाइयाँ लड़ी 3. अकबर के शासनकाल (1556-1605)में हम हिन्दुओं ने 20
लड़ाइयाँ लड़ी. 4. औरंगजेब के शासनकाल (1658-1707) में हिंदुओं ने 30
लड़ाइयाँ लड़ी...... जिसमे से एक ऐसी लड़ाई का नेतृत्व गुरु गोबिंद सिंह ने
किया था ... और मुगलों को परास्त किया था..! 5. चार साल बाद..... औरंगजेब है ने ... फिर अयोध्या पर
हमला किया और 10000 हिंदुओं की हत्या के बाद ही वो हमारे मंदिर
को नियंत्रण में ले पाया ..! 6. सहदात अली (1798-1814).. के समय हम हिंदुओं ने 5 लड़ाइयाँ लड़ी. 7. नासिरउद्दीन (1814-1837) हैदर .... के समय में हम हिंदुओं ने 3
लड़ाइयां लड़ी. 8. वाजिद अली शाह (1847-1857) के समय हिंदुओं ने 2 लड़ाइयाँ लड़ी. 9. ब्रिटिश (1912-1934) नियम के खिलाफ भी हम हिंदुओं ने 2 सशस्त्र
संघर्ष लड़ी...! अगर.... इतने सारे साक्ष्यों के प्रस्तुत करने के बाद भी.... मुस्लिम
बाबरी मस्जिद नामक अतिक्रमण के टूटने का शोक मनाते हैं...
तो इसका मतलब ये क्यों समझा जाये कि.. उन्हें भारतीय
सभ्यता संस्कृति से कोई लेना देना नहीं है.... तथा, वे बाबर जैसे दुर्दांत लुटेरे
(जो कि उस लंगड़े तैमुरलंग का परपोता और उस जीवित प्रेत चंगेज खान
का नाती था)... पर गर्व करते हैं और उन्हें ही अपना आइडल मानते हैं..! अगर ऐसा ही है तो.... इसका मतलब साफ है कि.... मुल्लों को बात
की नहीं बल्कि लात की भाषा समझ आती है....! जय महाकाल...!!! Disclaimer : ये लेख माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले
को प्रभावित करने अथवा अवमानना करने के उद्देश्य से नहीं ...
बल्कि.... उपलब्ध साक्ष्यों की जानकारी के उद्देश्य से लिखी गई है..! References : 1. Ram Janmabhoomi Vs Babri Masjid -by K. Elst,
Voice of India Publ, 1990, 173pp 2. Ayodhya & After -by K. Elst, Voice of India Publ,
1991, 419 pp 3. VHP's evidence on Ram Janmabhoomi, 6 th
January 1991 4. Vivek, Special Ayodhya issue 1993 5. Ram Janma Bhoomi - New Archeological Evidence,
by Y.D. Sharma et al published by Historians' Forum,
New Delhi, 1992 6. Ayodhya - Dec.6, 1992, Destruction of Babri
structure - Who? What? Why? A Video (report) by
Jain Studios, New Delhi. 

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